सप्तमी एकवचनम्


 
रामे (राम)  सर्वस्मिन् (सर्व-पुं)  विश्वपि (विश्वपा)  हाहे (हाहा)  हरौ (हरि)  सख्यौ (सखि)  पत्यौ (पति)  प्रध्यि (प्रधी-पुं-प्रध्यायति)  शम्भौ (शम्भु)  हूह्वि (हूहू)  अतिचम्वाम् (अतिचमू)  खलप्वि (खलपू-पुं)  लुवि (लू)  उल्ल्वि (उल्लू)  कटप्रुवि (कटप्रू)  स्वभुवि (स्वभू)  धातरि (धातृ-पुं)  गवि (गो)  सुद्यवि (सुद्यो)  स्मृतवि (स्मृतो)  रायि (रै-पुं)  ग्लावि (ग्लौ)  रमायाम् (रमा)  सर्वस्याम् (सर्वा)  द्वितीयस्याम् / द्वितीयायाम् (द्वितीया)  जरसि / जरायाम् (जरा)  नसि / नासिकायाम् (नासिका)  निशि / निशायाम् (निशा)  मत्याम् / मतौ (मति)  गौर्याम् (गौरी)  लक्ष्म्याम् (लक्ष्मी)  धेन्वाम् / धेनौ (धेनु)  वध्वाम् (वधू)  सुभ्रुवाम् / सुभ्रुवि (सुभ्रू)  खलप्वि (खलपू-स्त्री)  स्वसरि (स्वसृ)  रायि (रै-स्त्री)  द्यवि (द्यो)  नावि (नौ)  ज्ञाने (ज्ञान)  सर्वस्मिन् (सर्व-नपुं)  कतरे (कतर)  श्रीपे (श्रीपा)  वारिणि (वारि)  मधुनि (मधु)  धातरि / धातृणि (धातृ-नपुं)  प्ररिणि (प्ररै)  प्रद्युनि (प्रद्यो)  सुनुनि (सुनौ)  लिहि (लिह्)  तुरासाहि (तुरासाह्)  कमलि (कमल्)  कस्मिन् (किम्-पुं)  राज्ञि / राजनि (राजन्)  यज्वनि (यज्वन्)  गुणिनि (गुणिन्)  पथि (पथिन्)  बुधि (बुध्)  युजि (युज्-क्विप्-प्रत्ययान्तः)  त्यस्मिन् (त्यद्-पुं)  त्वयि (युष्मद्)  मयि (अस्मद्)  अग्निमथि (अग्निमथ्)  प्राचि (प्राच्)  क्रुञ्चि (क्रुञ्च्)  पयोमुचि (पयोमुच्)  धीमति (धीमत्)  भवति (भवत्)  पठति (पठत्)  ददति (ददत्-पुं)  गुपि (गुप्)  तादृशि (तादृश्)  विशि (विश्)  घृतस्पृशि (घृतस्पृश्)  दधृषि (दधृष्)  रत्नमुषि (रत्नमुष्)  प्रियषषि (प्रियषष्)  सुपिसि (सुपिस्)  विदुषि (विद्वस्)  सेदुषि (सेदिवस्)  ध्वसि (ध्वस्)  पुंसि (पुंस्)  वेधसि (वेधस्)  अमुष्मिन् (अदस्-पुं)  उपानहि (उपानह्)  उष्णिहि (उष्णिह्)  दिवि (दिव्)  गिरि (गिर्)  कस्याम् (किम्-स्त्री)  स्रजि (स्रज्)  त्यस्याम् (त्यद्-स्त्री)  वाचि (वाच्)  दिशि (दिश्)  दृशि (दृश्)  त्विषि (त्विष्)  अमुष्याम् (अदस्-स्त्री)  वारि (वार्)  कस्मिन् (किम्-नपुं)  ब्रह्मणि (ब्रह्मन्-नपुं)  त्यस्मिन् (त्यद्-नपुं)  स्वपि (स्वप्)  धनुषि (धनुष्)  पयसि (पयस्)  अमुष्मिन् (अदस्-नपुं)  एकस्मिन् (एक-पुं)  एकस्याम् (एक-स्त्री)  एकस्मिन् (एक-नपुं)  त्रिंशति (त्रिंशत्)