षष्ठी द्विवचनम्


 
रामयोः (राम)  सर्वयोः (सर्व-पुं)  विश्वपोः (विश्वपा)  हाहौः (हाहा)  हर्योः (हरि)  सख्योः (सखि)  पत्योः (पति)  द्वयोः (द्वि-पुं)  प्रध्योः (प्रधी-पुं-प्रध्यायति)  शम्भ्वोः (शम्भु)  हूह्वोः (हूहू)  अतिचम्वोः (अतिचमू)  खलप्वोः (खलपू-पुं)  लुवोः (लू)  उल्ल्वोः (उल्लू)  कटप्रुवोः (कटप्रू)  स्वभुवोः (स्वभू)  धात्रोः (धातृ)  गवोः (गो)  सुद्यवोः (सुद्यो)  स्मृतवोः (स्मृतो)  रायोः (रै-पुं)  ग्लावोः (ग्लौ)  रमयोः (रमा)  सर्वयोः (सर्वा)  द्वितीययोः (द्वितीया)  जरसोः / जरयोः (जरा)  नसोः / नासिकयोः (नासिका)  निशोः / निशयोः (निशा)  मत्योः (मति)  द्वयोः (द्वि-स्त्री)  गौर्योः (गौरी)  लक्ष्म्योः (लक्ष्मी)  धेन्वोः (धेनु)  वध्वोः (वधू)  सुभ्रुवोः (सुभ्रू)  खलप्वोः (खलपू-स्त्री)  स्वस्रोः (स्वसृ)  रायोः (रै-स्त्री)  द्यवोः (द्यो)  नावोः (नौ)  ज्ञानयोः (ज्ञान)  सर्वयोः (सर्व-नपुं)  कतरयोः (कतर)  श्रीपयोः (श्रीपा)  वारिणोः (वारि)  मधुनोः (मधु)  धात्रोः / धातृणोः (धातृ-नपुं)  प्ररिणोः (प्ररै)  प्रद्युनोः (प्रद्यो)  सुनुनोः (सुनौ)  लिहोः (लिह्)  तुरासाहोः (तुरासाह्)  कमलोः (कमल्)  कयोः (किम्-पुं)  राज्ञोः (राजन्)  यज्वनोः (यज्वन्)  गुणिनोः (गुणिन्)  पथोः (पथिन्)  बुधोः (बुध्)  युजोः (युज्-क्विप्-प्रत्ययान्तः)  त्ययोः (त्यद्-पुं)  युवयोः / वाम् (युष्मद्)  आवयोः / नौ (अस्मद्)  अग्निमथोः (अग्निमथ्)  प्राचोः (प्राच्)  क्रुञ्चोः (क्रुञ्च्)  पयोमुचोः (पयोमुच्)  धीमतोः (धीमत्)  भवतोः (भवत्)  पठतोः (पठत्)  ददतोः (ददत्)  गुपोः (गुप्)  तादृशोः (तादृश्)  विशोः (विश्)  घृतस्पृशोः (घृतस्पृश्)  दधृषोः (दधृष्)  रत्नमुषोः (रत्नमुष्)  प्रियषषोः (प्रियषष्)  सुपिसोः (सुपिस्)  विदुषोः (विद्वस्)  सेदुषोः (सेदिवस्)  ध्वसोः (ध्वस्)  पुंसोः (पुंस्)  वेधसोः (वेधस्)  अमुयोः (अदस्-पुं)  उपानहोः (उपानह्)  उष्णिहोः (उष्णिह्)  दिवोः (दिव्)  गिरोः (गिर्)  कयोः (किम्-स्त्री)  स्रजोः (स्रज्)  त्ययोः (त्यद्-स्त्री)  वाचोः (वाच्)  दिशोः (दिश्)  दृशोः (दृश्)  त्विषोः (त्विष्)  अमुयोः (अदस्-स्त्री)  वारोः (वार्)  कयोः (किम्-नपुं)  ब्रह्मणोः (ब्रह्मन्-नपुं)  त्ययोः (त्यद्-नपुं)  स्वपोः (स्वप्)  धनुषोः (धनुष्)  पयसोः (पयस्)  अमुयोः (अदस्-नपुं)  द्वयोः (द्वि-नपुं)