चतुर्थी एकवचनम्


 
रामाय (राम)  सर्वस्मै (सर्व-पुं)  विश्वपे (विश्वपा)  हाहै (हाहा)  हरये (हरि)  सख्ये (सखि)  पत्ये (पति)  प्रध्ये (प्रधी-पुं-प्रध्यायति)  शम्भवे (शम्भु)  हूह्वे (हूहू)  अतिचम्वै (अतिचमू)  खलप्वे (खलपू-पुं)  लुवे (लू)  उल्ल्वे (उल्लू)  कटप्रुवे (कटप्रू)  स्वभुवे (स्वभू)  धात्रे (धातृ)  गवे (गो)  सुद्यवे (सुद्यो)  स्मृतवे (स्मृतो)  राये (रै-पुं)  ग्लावे (ग्लौ)  रमायै (रमा)  सर्वस्यै (सर्वा)  द्वितीयस्यै / द्वितीयायै (द्वितीया)  जरसे / जरायै (जरा)  नसे / नासिकायै (नासिका)  निशे / निशायै (निशा)  मत्यै / मतये (मति)  गौर्यै (गौरी)  लक्ष्म्यै (लक्ष्मी)  धेन्वै / धेनवे (धेनु)  वध्वै (वधू)  सुभ्रुवै / सुभ्रुवे (सुभ्रू)  खलप्वे (खलपू-स्त्री)  स्वस्रे (स्वसृ)  राये (रै-स्त्री)  द्यवे (द्यो)  नावे (नौ)  ज्ञानाय (ज्ञान)  सर्वस्मै (सर्व-नपुं)  कतराय (कतर)  श्रीपाय (श्रीपा)  वारिणे (वारि)  मधुने (मधु)  धात्रे / धातृणे (धातृ-नपुं)  प्ररिणे (प्ररै)  प्रद्युने (प्रद्यो)  सुनुने (सुनौ)  लिहे (लिह्)  तुरासाहे (तुरासाह्)  कमले (कमल्)  कस्मै (किम्-पुं)  राज्ञे (राजन्)  यज्वने (यज्वन्)  गुणिने (गुणिन्)  पथे (पथिन्)  बुधे (बुध्)  युजे (युज्-क्विप्-प्रत्ययान्तः)  त्यस्मै (त्यद्-पुं)  तुभ्यम् / ते (युष्मद्)  मह्यम् / मे (अस्मद्)  अग्निमथे (अग्निमथ्)  प्राचे (प्राच्)  क्रुञ्चे (क्रुञ्च्)  पयोमुचे (पयोमुच्)  धीमते (धीमत्)  भवते (भवत्)  पठते (पठत्)  ददते (ददत्)  गुपे (गुप्)  तादृशे (तादृश्)  विशे (विश्)  घृतस्पृशे (घृतस्पृश्)  दधृषे (दधृष्)  रत्नमुषे (रत्नमुष्)  प्रियषषे (प्रियषष्)  सुपिसे (सुपिस्)  विदुषे (विद्वस्)  सेदुषे (सेदिवस्)  ध्वसे (ध्वस्)  पुंसे (पुंस्)  वेधसे (वेधस्)  अमुष्मै (अदस्-पुं)  उपानहे (उपानह्)  उष्णिहे (उष्णिह्)  दिवे (दिव्)  गिरे (गिर्)  कस्यै (किम्-स्त्री)  स्रजे (स्रज्)  त्यस्यै (त्यद्-स्त्री)  वाचे (वाच्)  दिशे (दिश्)  दृशे (दृश्)  त्विषे (त्विष्)  अमुष्यै (अदस्-स्त्री)  वारे (वार्)  कस्मै (किम्-नपुं)  ब्रह्मणे (ब्रह्मन्-नपुं)  त्यस्मै (त्यद्-नपुं)  स्वपे (स्वप्)  धनुषे (धनुष्)  पयसे (पयस्)  अमुष्मै (अदस्-नपुं)  एकस्मै (एक-पुं)  एकस्यै (एक-स्त्री)  एकस्मै (एक-नपुं)  त्रिंशते (त्रिंशत्)